Aug 24, 2026

गवर्नर गुलाब चंद कटारिया ने BSF जवानों का हौसला बढ़ाने के लिए मौजम का दौरा किया




जवानों को रक्षा बंधन की बधाई


फाजिल्का, 23 अगस्त: पंजाब के गवर्नर गुलाब चंद कटारिया ने BSF जवानों का हौसला बढ़ाने के लिए फाजिल्का के मौजम गांव का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने BSF जवानों को रक्षा बंधन के मौके पर बधाई भी दी।


जवानों से मिलते हुए पंजाब के गवर्नर गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि हमें अपने बहादुर जवानों पर गर्व है, जो हमारे देश की रक्षा के लिए अपनी जान की परवाह किए बिना बॉर्डर पर तैनात हैं। उन्होंने कहा कि हमारे इन्हीं बहादुर जवानों की वजह से हम आज आजादी का मजा ले रहे हैं।


BSF जवानों को रक्षा बंधन के मौके पर बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि रक्षा बंधन का त्योहार बहनों और भाइयों के प्यार और खुशी का प्रतीक है। इस दिन बहनें अपने भाइयों के लिए कई उम्मीदों और इच्छाओं के साथ राखी लाती हैं। उन्होंने कहा कि आज वह अपने जिले की महिलाओं और बेटियों की भी शुक्रगुजार हैं, जो इस पवित्र त्योहार पर BSF जवानों को राखी बांधकर उनका हौसला बढ़ाने पहुंची हैं। इस मौके पर डिप्टी कमिश्नर फाजिल्का श्रीमती अमरप्रीत कौर और SSP श्री गगनजीत सिंह भी मौजूद थे।


Aug 22, 2026

ਬਾਬੂ ਰਜਬ ਅਲੀ ਦੀ ਕੋਠੀ(Babu Rajjab Ali dee kothi)


ਪਿੰਡ Dhippan wali ਦੇ ਕੋਲ ਅਰਨੀਵਾਲਾ ਮਾਈਨਰ ਤੇ ਬਾਬੂ ਰਜਬ ਅਲੀ ਦੀ ਕੋਠੀ ਹੈ, 1939 ਵਿਚ ਜਦੋ ਮਾਈਨਰ ਬਣੀ ਸੀ- ਓਦੋਂ ਬੈਂਤ ਛੰਦ ਦੇ ਰਚਨਹਾਰਾ ਬਾਬੂ ਰਜਬ ਅਲੀ ਨਹਿਰੀ ਵਿਭਾਗ ਵਿਚ ਮੁਲਾਜਮ ਸੀ- ਬੁਗੁਰਗ ਦਸਦੇ ਹਨ ਕਿ ਓਦੋ ਫਾਜ਼ਿਲਕਾ ਇਲਾਕਾ ਖੁਸ਼ਕ ਸੀ-ਬਾਬੂ ਰਜਬ ਅਲੀ ਨੇ ਕਿਸਾਨਾ ਨੂੰ ਨੇਹਰੀ ਪਾਣੀ ਦੇਣ ਲੈ ਮਾਈਨਰ ਵਿਚੋਂ ਕਈ ਮੋਘੇ ਰਖੇ ਸੀ-ਆਖਦੇ ਹਨ ਕਿ ਬਾਬੂ ਰਜਬ ਅਲੀ ਦੀ 2nd mariage ਪਿੰਡ ਗੰਧੜ ਪਿੰਡ ਦੀ ਬੀਬੀ ਫਾਤਿਮਾ ਨਾਲ ਹੋਈ ਸੀ- ਪਰ ਉਸ ਦੀ ਮੋਤ ਹੋ ਗਈ- ਤੀਸਰੀ ਸ਼ਾਦੀ ਅਬੋਹਰ ਨੇੜੇ ਪਿੰਡ ਕਲਾ ਟਿੱਬਾ ਦੀ ਬੀਬੀ ਰਹਮਤ ਨਾਲ ਹੋਈ ਸੀ- 

Aug 18, 2026

भैरव राक्षस गुफा – पोखरण

 

भैरव राक्षस गुफा – पोखरण


भैरव राक्षस गुफा राजस्थान के पोखरण क्षेत्र से जुड़ा एक प्रसिद्ध धार्मिक एवं लोक-आस्था का स्थल है। यह गुफा Baba ramdev ji  से जुड़ी प्रचलित लोककथा के कारण श्रद्धालुओं के बीच विशेष महत्व रखती है। उपलब्ध स्थानीय विवरणों के अनुसार यह गुफा पोखरण के निकट, कैलाश टेकरी के आसपास स्थित मानी जाती है और रामदेवरा मंदिर से करीब 12 किलोमीटर की दूरी बताई जाती है। 

लोककथा के अनुसार भैरव नामक राक्षस का आतंक पोखरण और आसपास के क्षेत्र में फैला हुआ था। कहा जाता है कि बाबा रामदेवजी अपने गुरु बालीनाथजी के आश्रम में पहुंचे। बालीनाथजी ने उन्हें भैरव से सावधान किया और अपनी कुटिया में छिपा लिया। कथा के अनुसार भैरव वहां पहुंचा और मनुष्य की गंध महसूस कर बाबा रामदेवजी को खोजने लगा। बाद में बाबा रामदेवजी ने उसका सामना किया और लोगों को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई। 

प्रचलित मान्यता के अनुसार भैरव राक्षस जिस गुफा में गया, वही स्थान आगे चलकर भैरव राक्षस गुफा के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इस स्थल से जुड़ी मान्यताएं आज भी स्थानीय धार्मिक परंपराओं में दिखाई देती हैं। कुछ विवरणों के अनुसार रामदेवजी की पूजा के बाद भैरव राक्षस को बाकला चढ़ाने की परंपरा भी बताई जाती है। 

गुफा के आसपास का क्षेत्र राजस्थान के मरुस्थलीय प्राकृतिक परिवेश, पहाड़ियों और लोक-आस्था का अनूठा संगम प्रस्तुत करता है। इसलिए रामदेवरा और पोखरण आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह स्थान धार्मिक इतिहास और लोककथाओं से जुड़ा एक आकर्षण माना जाता है।


Aug 16, 2026

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर मुख्य अभियंता बिजेंद्र सिंह नारा ने राष्ट्र निर्माण में बीएसएल परियोजना की भूमिका पर दिया जोर

 




सुंदरनगर, 15 अगस्त: 2026
बीएसएल परियोजना सुंदरनगर पर 80वां स्वतंत्रता दिवस स्‍थानीय बीएसएल सीनियर सेकेंडरी स्कूल प्रांगण में पूरे उत्साह और राष्ट्रीय भावना के साथ मनाया गया।
इस अवसर पर मुख्‍य अतिथि के रूप में सदस्य सिंचाई एवं मुख्य अभियंता बीएसएल परियोजना सुंदरनगर, इंजी. बिजेंद्र सिंह नारा ने ध्वजारोहण किया और मार्च पास्ट की सलामी ली।
इस मौके पर बीएसएल परियोजना के स्कूलों के एनसीसी और एनएसएस के छात्रों ने शानदार मार्च पास्ट का प्रदर्शन किया। इस दौरान स्कूली छात्रों द्वारा देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत शानदार सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए।  
अपने संबोधन में श्री नारा ने स्‍वतन्‍त्रता संघर्ष के शहीदों को नमन किया और राष्ट्र निर्माण में बीएसएल परियोजना की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने महात्मा गांधी, भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, चंद्रशेखर आजाद, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, रानी लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे, राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान, खुदीराम बोस और लाला लाजपत राय सहित अनगिनत वीर-वीरांगनाओं के योगदान को याद किया।
श्री नारा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल के नेतृत्व में राष्ट्र निर्माण के कार्यों को नई गति मिलने का उल्लेख करते हुए कहा कि बीबीएमबी और सुंदरनगर स्थित बीएसएल परियोजना राष्ट्र निर्माण की जीवंत मिसाल है। उन्होंने बताया कि यह परियोजना ब्‍यास नदी के जल को सतलुज प्रणाली से जोड़कर सिंचाई, पेयजल और जलविद्युत उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। देहर पावर हाउस सहित बीबीएमबी की परियोजनाएं देश की ऊर्जा सुरक्षा और कृषि उत्पादकता को मजबूती प्रदान कर रही हैं। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश के लाखों किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाना तथा करोड़ों इकाइयां बिजली पैदा करना सच्ची राष्ट्रसेवा है।
बीबीएमबी अध्यक्ष मनोज त्रिपाठी के सक्षम नेतृत्व की सराहना करते हुए उन्होंने जल संसाधन प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण, सिल्ट प्रबंधन और आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर बल दिया। उन्होंने बीबीएमबी परिवार के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों की लगन और मेहनत की प्रशंसा की।
युवाओं और बच्चों को संबोधित करते हुए श्री नारा ने कहा कि आजादी बनाए रखना अब उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने ज्ञान, नवाचार, अनुशासन, निष्ठा, स्वच्छता और प्रकृति संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि हर छोटा कदम राष्ट्र निर्माण में बड़ा योगदान बनता है। उन्होंने जल के इष्‍टतम उपयोग, स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और भागीदार राज्यों की जरूरतों को समय पर पूरा करने का संकल्प दोहराया तथा आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य में बीबीएमबी का पूर्ण योगदान सुनिश्चित करने की बात कही।
कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों, बीबीएमबी अधिकारियों-कर्मचारियों, सुंदरनगर की जनता, युवाओं, माताओं-बहनों और बच्चों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई देते हुए उन्होंने वंदे मातरम्, जय हिंद और जय भारत के नारे के साथ अपना संबोधन समाप्त किया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करने वाले और परेड में शामिल सभी छात्रों को उपहार भेंट किए गए।
इस समारोह में अधीक्षण अभियन्‍ता, परिमण्‍डल नं0-2 श्री हरजोत सिंह वालिया, कार्यकारी अभियन्‍ता गुलशन मान, मनप्रीत सिंह गिल, डी. के. वर्मा, दिनेश कुमार यादव, चंद्र मोहन, एवं पीआरओ अवतार सिंह धालीवाल के साथ साथ बीएसएल परियोजना के अधिकारियों, कर्मचारियों तथा बड़ी संख्‍या में स्‍थानीय नागरिकों ने भी शिरकत की । समारोह का संचालन एपीआरओ अशोक शुक्‍ला द्वारा किया गया ।




Aug 9, 2026

वंस एग्न्यू का कलकत्ता से मुल्तान तक का सफर



सतलुज दरिया के किनारे हरियाली, लहलहाते खेत, कहीं धूल, कहीं जंगल। यह अद्भुत व मनमोहक नजारा, उन ग्रामीणों के लिए तो कोई नया नहीं था, जो बरसों से इस नजारे के आसपास रह रहे थे, लेकिन उस व्यक्ति के लिए यह नजारा वास्तव में अद्भुत था, जिसने यहां एक शहर बसाने की सोची। वैसे कोई शहर बसाया नहीं जाता। अलग-अलग शहर खुद ही बस जाते हैं, लेकिन उसमें किसी न किसी व्यक्ति का हाथ, सहयोग और समर्पण जरूर होता है। ऐसे ही एक शख्स थे, वंस एग्न्यू यानी पैट्रिक वंस एग्न्यू। वंस एग्न्यू तो उनका सर नेम था। उनका असली नाम था, पैट्रिक एलेक्जेंडर। सर नेम मिलने के बाद उनका नाम पैट्रिक एलेक्जेंडर वंस एग्न्यू पड़ गया। वंस एग्न्यू एक ऐसे ब्रिटिश अधिकारी थे जो पंजाबी भाषा का भी ज्ञान रखते थे। उनका फाजिल्का को बसाने की राह में अहम योगदान है। फाजिल्का के इतिहास में बंगले की दास्तान के जिक्र दौरान मुसलमान फजल खां बढ़ू के नाम के साथ वंस एग्न्यू का जिक्र जरूर होगा। पिता के नक्शे कदमों पर चलकर ब्रिटिश आर्मी में भर्ती होने वाले वंस एग्न्यू बंगाल सिविल सर्विस में तैनात हुए।

इसके बाद उन्हें भटियाणा में सहायक सुपरिटेंडेंट के पद पर तैनात किया गया। वह एक सिपहसालार अधिकारी की कला में माहिर हो गए। हालांकि उनकी आयु कम थी। मगर ब्रिटिश अफसरों में उनका प्रदर्शन अच्छा रहा। उनका मनपसंद काम शहरों को आबाद करना। वह जहां भी गए। शहरों के विकास में उनका अहम योगदान रहा। बात चाहे फाजिल्का की हो या लाहौर की। वह तीन बातों में इतफाक रखते थे, पहली बात किसी चीज को आरंभ करने के लिए सही जगह क्या है? दूसरा किन लोगों को मिलना या सुनना चाहिए? उनके जहन में तीसरी बात यह थी कि सब से महत्वपूर्ण कार्य क्या है, जिसे प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। इस सोच को आधार मानकर ही उन्होंने फाजिल्का शहर बसाने में प्राथमिकता से काम किया।